धर्म जागरण मंच में स्वागत है

गोरखपुर,उत्तर प्रदेश

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विशेष सूचना -

                                        आत्म प्रेरणा से प्रेरित होकर "धर्म जागरण मंच" न्यास/ट्रष्ट 

                            उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्टर्ड कराया हैं जिसका उद्देश्य इस प्रकार हैं | 

समाज के समग्र विकास हेतु मै चिंतन करता रहता हूँ | समस्त मानव जाति के सर्वांगीण विकास के लिए उत्कृष्ट शिक्षा का प्रचार-प्रसार होता रहे, जिससे स्वस्थ,श्रेष्ठ व सभ्य समाज का निर्माण हो सके| स्वधर्म,राष्ट्रधर्म इत्यदि सभी धर्मों के निर्वहन के साथ आपसी भाईचारा, स्नेह-सौहार्द्र के साथ युवाओं का आध्यात्मिक, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक व नैतिक विकास हो सके,ऐसे नागरिकों से ही राष्ट्र गौरवान्वित होता हैं | हमारे मन मस्तिष्क में अपने व्यक्तिगत कार्यों के साथ-साथ समाज व राष्ट्र हित का चिंतन सदैव बना रहता है | हमारी प्रबल इच्छा है कि समाज में सुख शान्ति,आपसी सद्भाव, विश्वास, सदाचार, शिक्षा, स्वस्थ्, एवं आदर्श नागरिक गुणों की स्थापना हो| समाज के साधनहीन व्यक्तियों के जीवन की मूल-भूत आवश्यकताएं भोजन,शिक्षा,व आवास की व्यवस्था हो तथा शिक्षित बेरोजगारों को उनके योग्यता के अनुरूप तकनीकि, व्यवहारिक व आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर उन्हें रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया जाय | जनहित के उक्त कार्यों को संचालित करने तथा उससे अधिकाधिक लाभ प्रदान करने के लिए विभिन्न विधाओं में समाज को शिक्षित किये जाने की आवश्यकता को देखते हुए विभिन्न संस्थाओं व विभिन्न समितियों का गठन किया जाना आवश्यक पाकर इसकी सम्पूर्ण वस्था के लिए एक कल्याणकारी न्यास/ट्रष्ट की स्थापना की जा रही हैं जिससे हमारी प्रकृति एवं संस्कृति की रक्षा हो सके | अपने उक्त हार्दिक इच्छा की पूर्ति के लिए तथा इस हेतु आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के लिए न्यास कोष स्थापित किया हैं| और आगे भी इस न्यास कोष में विभिन्न उपायों से धन तथा चल-अचल संपत्ति की हम व्यवस्था करते रहेंगे |

वसुधैव कुटुम्बकम के आधार पर विश्व कल्याणार्थ

सर्वे भवन्तु सुखिनः,सर्वे सन्तु निरामयाः,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु,माकश्चित् दुःख भाग भवेत् ||

के उद्देश्य से न्यास मंडल,भविष्य में निर्मित होनेवाली प्रबन्ध समिति तथा संस्थान से सम्बन्धित सभी सदस्य धर्म के साथ उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्य करते रहेगें |

1-यह कि मेरे द्वारा स्थापित न्यास का नाम "धर्म जागरण मंच" हैं | इस न्यास में आगे "न्यास अथवा ट्रष्ट" के नाम से सम्बोधित किया जायेगा |

न्यास का कार्यालय- देव नगर मनहट तारामंडल निकट वाणिज्य कर पोस्ट- सिद्धार्थ एन्क्लेव जिला- गोरखपुर 273017 उ.प्र. भारत हैं | उक्त न्यास के कार्यों को सुचारु रूप से सम्पादित करने तथा इसके उदेश्य की सुगम प्राप्ति के लिए इसके अन्य कार्यालयों को स्थापित कर सकेगें |

न्यास के संचालन व व्यवस्था के लिए मुख्य न्यासी द्वारा अन्य व्यक्तियों को को भी नियुक्त कीया  जाएगा |

न्यास का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष होगा तथा आवश्यकता पड़ने पर विधि व्यवस्थाओं के अनुसार देश के बाहर विदेश में भी न्यास संचालन हो सकेगा | संस्था का आदर्श वाक्य "यतो धर्मस्ततो जयः" हैं | न्यास की पहचान पुरे विश्व में "लोगो चिन्ह" से भी होगी जो दस्तावेज में छपा है |

मेरे द्वारा ट्रष्ट के संचालन व व्यवस्था के लिए अन्य व्यक्तियों को जो ट्रस्ट के उद्देश्यों के अनुसार ट्रष्ट के हित में कार्य करने को सहमत है, उनको संरक्षक,अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,सचिव,सदस्य इत्यादि पदों पर पुरे देश व विदेश में नियुक्त किया जायेगा |

जयतु श्री जगदम्बिके

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न्यास/ट्रस्ट के मुख्य उद्देश्य :-

वेद,ज्योतिष,व्याकरण,योग,आयुर्वेद,साहित्य की शिक्षा हेतु प्राथमिक, माध्यमिक, स्नातक, परास्नातक, शिक्षाशास्त्री तथा अनुशंधान की सुविधा प्रदान करने के लिए पाठशाला,विद्यालय महाविद्यालय,तथा विश्वविद्यालय की स्थापना कर संचालन करना एवं वैदिक,तांत्रिक, पौराणिक मंत्र,साधना,कर्मकांड की शिक्षा व संस्कृत भाषा को समृद्ध करने के लिए,लोक कल्याण के की दृष्टि से गुरुकुल एकेडमी की स्थापना कर संचालन करना |विभिन्न विधाओं के नागरिकों को विविध उपाधियों से सम्मान करना जो समाज एवं राष्ट्र हित में कार्य किया हो| वे सभी कार्य जो समाज, देश विश्व के साथ लोक कल्याण की दृष्टि से सही हो |

गोरक्षा,गोपालन के साथ संस्कार व संस्कृति के लिए तथा राष्ट्र कल्याण के लिए विविध क्षेत्रों में संगठनों को स्थापित कर संचालित करना इत्यादि सामिल है | समाज व राष्ट्र कल्याण के लिए जिस भी क्षेत्र में लगे की संगठन तैयार कर कार्य करना आवश्यक तो धर्म जागरण मंच आप को महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जिम्मेदारी सौपते हुए उसे क्रियान्वित करेगा |

संस्था का उदेश्य केवल मानव कल्याण न होकर सर्वे भवन्तु सुखिनः है | अर्थात सृष्टि के हर प्राणी के साथ पंचतत्व यु कहे सृष्टि के वे सभी कार्य जिससे किसी भी प्रकार का अभ्युदय हो, कहा है “सा विद्या या विमुक्तये” विद्या वही है जो संसार के सभी सुखो के भोग के बाद मुक्त करा दे मनुष्य के पुरुषार्थ में सिर्फ मोक्ष न होकर धर्म ,अर्थ ,काम व मोक्ष है | आज कल धर्म पूर्वक अर्थ नहीं अर्जित किया जा रहा है नहीं अर्थ को धर्म कार्यो में लगाया जा रहा है | जीवन का उदेश्य सिर्फ धनार्जन रह गया है | कुछ ही लोग धर्म पूर्वक अर्थार्जन कर रहे है | क्या मानव जीवन का उदेश्य सिर्फ धनार्जन है ? नहीं  मनुष्य के चार पुरुषार्थ है जो उपरोक्त है धनार्जन करना गलत नहीं धनात् धर्मं ततः सुखम अर्थात धन से सत्कर्म व धर्म करे उसके बाद तो सुख मिलाना ही है | अर्थात सुखी जीवन जीते हुए मुक्त हो जाना मानव जीवन का उदेश्य है इसमें बहुत महत्वपूर्ण बात बताना शेष है शीघ्र ही आपके सामने अपने विचार रखुगा |

आप अगर आप धर्म जागरण मंच ट्रस्ट में किसी भी प्रकार का सहयोग करना चाहते है, आपकी इच्छा है कि हमारा कुछ धन-संपत्ति धर्म कार्यों में सही जगह लगे तो यह ट्रस्ट आपकी ईच्छा अनुरूप पूर्ण विस्वाश के साथ साकार रूप देगा | उपरोक्त उदेश्य की पूर्ति हेतु ट्रस्ट के बैंक खाते में अपनी श्रद्धा के अनुरूप धनराशि जमा कर सकते हैं |

धर्म जागरण मंच एक आध्यात्मिक संस्था है जिसका लोक कल्याण के दृष्टि से निर्माण किया गया है | इसमें आप फॉर्म  भर कर जुड़ सकते है | अगर आप चाहते है की सचमुच देश के कल्याण के साथ लोक कल्याण करना हमारा भी कर्तव्य है तो आप को इस संस्था से अवश्य जुड़ना चाहिए आपका ह्रदय से स्वागत है| धन्यवाद |

डॉ धनेश मणि त्रिपाठी अध्यक्ष/मुख्य ट्रस्टी धर्म जागरण मंच
तारामंडल, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

 

ट्रस्ट का खाता विवरण –

SBI BANK  NAME-  DHARMA JAGRAN MANCH

    A/C 38051523225 IFSC CODE- SBIN0003205  

आप सभी जानकारी 9598511511 नंबर पर प्राप्त कर सकते हैं |

सेवायें-

आवश्यतानुसार समाज व राष्ट्रहित में किसी प्रकार की सेवा धर्म जागरण मंच अपनी क्षमता अनुसार देने के लिए वचनबद्ध हैं |

 

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गोरखपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन

Gorakhpur Junction railway station

गोरखपुर बस अड्डा

Gorakhpur Bus Stand

गोरखपुर हवाई अड्डा

Mahayogi Gorakhnath Airport

गोरखनाथ मंदिर

Goranath temple

नोट: गोरखपुर से इन स्थलों पर भ्रमण व पूर्वांचल की सांस्कतिक धरोहर का दर्शन लाभ ले सकते हैं |

सम्मेलन स्थल से-

  • गोरखनाथ मंदिर 8 किमी
  • गीताप्रेस 7 किमी
  • गीता वाटिका 7 किमी राधा कृष्ण मंदिर (जहाँ सन 1968 से अखंड ज्योति के साथ अखंड षोडसाक्षर मन्त्र से हरिकीर्तन हो रहा हैं |
  • कुशीनगर गोरखपुर से 50 किमी पूरब में स्थित है.
  • यहाँ अनेक सुन्दर बौद्ध मन्दिर हैं। इस कारण से यह एक अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भी है ।
  • भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या – 120 किमी
  • ज्योतिर्लिंग बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी – 200 किमी
  • नेपाल बार्डर, सोनौली – 97 किमी
  • बुटवल,नेपाल – 126 किमी
  • पोखरा,नेपाल- 285 किमी
  • काठमांडू – 370 किमी